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Wednesday, April 29, 2015

गाडी कि सर्विसिंग…

मेरी एक प्यारीसी दोस्त है स्नेहा... कुछ हफ्ते पहले किसी काम से वो मेरी गाड़ी ले गयी थी... तब उसने मेरी गाड़ी की हालत देखी... काफी टाइम से सर्विसिंग न करने की वजहसे उसकी हालत थोड़ी बिगड़ गयी थी... क्या करे यार हम मम्मी लोग को घर के कामकाज से फुर्सत मिले तब ये सब काम हो न... :( 
एक दो हफ्ते बाद... वीकेंड पे स्नेहा ने फिर से गाड़ी मांगी और बोला की कुछ काम है... मैंने सोचा यार होगा कुछ काम... तो मैंने देदी अपनी गाड़ी...
पता है लड़की ने क्या किया??????? 
मुझे बिना बताये मेरी गाड़ी की मस्त सर्विसिंग करायी... एकदम चमका दिया गाड़ी को और वापस देके चली गयी... मुझे बिलकुल अंदाजा नहीं था की लड़की ऐसा कुछ करेगी... थोड़ा गुस्सा आया... थोड़ा बुरा लगा... और बहुत अच्छा भी लगा... :) गुस्सा इसलिए के मेरे लिए इतना कुछ क्यों कर दिया.... ;)
Anyways... तो मेरी प्यारी गाड़ी के लिए कुछ लिख डाला मैंने :)
क्या यार स्नेहा... ये तूने क्या कर दिया...?
बिना मुझे बताए... मेरी गाड़ी का सर्विसिंग करा दिया...
पिछले एक महीने से... मैंभी यही सोच रही थी...
इसी चक्कर में मेरी गाड़ी... मुझसे थोड़ा रूठ भी गयी थी...
 
मेरी तरह इसके भी... दो चार स्क्रू ढीले हो गए थे...
बिना बदले टायर भी... इतने सालोंसे चल रहे थे...
कभी कभी बंद हो जाती... पर अबतक अच्छा साथ निभाया है...
मेरा हर छोटा बड़ा काम... इसकी वजह से पूरा होता आया है...
खुद की तरह इसका भी... थोड़ा काम ही ख़याल रखती थी...
अपनी मालकिन की तरह... इसको भी अब आदत सी हो गयी थी... 

यार... उसके टूटे फाइबर से... मस्त खड़खड़ आवाज आती थी...
हिंजवडी-माण गाँव के रस्ते की... हम दोनों को आदत हो चुकी थी...
ब्रेक का इस्तेमाल तो... मैं वैसे भी नहीं करती थी...
लगते ही नहीं थे दोनों... तो गाड़ी अपने आप ही सँभाल लेती थी...
पॉलिश तो दूर की बात... यहाँ ऑइल भी कभी कबार ही चेंज होता है...
साल में सिर्फ एकहि बार... दशहरेपे ही इसका स्नान होता है...

पर जब से तूने सर्विसिंग करायी है... इसका तो अंदाज ही बदल गया है...
सरासर मुझे पेहचानने से... इसने इन्कार कर दिया है... :(
बस एक मेक ओव्हर से
... ये इतना अकड़ गयी है...
मुझ बिचारी मलकिनको... बिलकुल भाव ही नहीं दे रही है... :(

क्यूँ न रूठे वो मुझसे... मैं ख़याल ही नहीं रखती हूँ...
अब आगे से ऐसा नहीं होगा... यह प्रॉमिस आज करती हूँ... :)
अब तो हर क़्वार्टर के बोनस के साथ... इसकी सर्विसिंग जरूर होगी...
वीक में एक बार तो... अपनी गाड़ी चमक उठेगी...

६ साल में ३६ हजार किलोमीटर... इसने इतना साथ निभाया है...
हर मुश्किल रस्ते को... मंजिल से मिलाया है...
ऐसेही हमें... और कई सालों तक साथ चलना है...
अपने साथ साथ मुझे... गाड़ी का भी अछेसे ख़याल रखना है... :)
Sneha..You made me realize... I must take care of my Gadi...
Only because of her... Shilpa is EverReady.... :)

Thanks so much My Dear Gadi... :)

- टिंग्याची आई 
कधी कधी वाटतं… नशीब या पोरीने माझी कॉलेज टाईम ची गाडी नाही पाहिली… नाहीतर न सांगता माझ्या दारात नवीकोरी Activa उभी केली असती हिने…. :);)

Monday, November 24, 2014

बिदाई का दिन….

मेरी एक प्यारीसी दोस्त है.… ऑफिस में हम लोग साथ में काम करते है.… उसका घर भुवनेश्वर में है और वो पुणे में जॉब करती है.… घर इतना दूर है तो बार बार जा नहीं सकती इसीलिए हर ६ महीने में एक बार घर जाती है लंबी छुट्टी लेके.…
और हर बार वापस आते वक्त कुछ यही समां होता है घर पे.…
उसकी बिदाई का ये दिन मेरी जबानी.…
वह दिन तो काफी सुहाना लग रहा था.…
हमेशा की तरह सूरज खुशियाँ बरसा रहा था.…
लेकिन घर में एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था.…
हर कोई बिटिया के वापिस जाने के गम में डूबा हुआ था.…

माँ की लाड़ली, पापा की प्यारी बिटिया है वो.…
छोटी की बेस्ट फ्रेंड, इस घर की खुशियाँ है वो.…
घर से दूर किसी शहर में.… लड़ो नौकरी करती है.…
६ महीने में बस एक ही बार.… घर वापस आ पाती है.…
ना कोई बंधन है यह.… और ना ही कोई मज़बूरी.…
पर बेटीका इंडिपेंडेंट होना है बहुत जरुरी.…
इसीलिए.… घर से इतनी दूर वो रह लेती है.…
जुदाई का गम.… माँ-बेटी हर दिन सहती है.…

आज भी.… बिटिया का वापसी का दिन था.…
इसीलिए सुबहसे.… घर में सन्नाटे वाला सीन था.…
पॅकिंग वगैरा सब कुछ.… कब की हो गयी थी.…
फिर भी माँ एक एक चीज़.… याद दिला रही थी.…
१५ दिन कब निकल गए.… पता ही नहीं चला था.…
फिर एक बार जुदाई का वो पल.… चुपकेसे आ गया था.…

मुश्किल हो जाते है पल.… जैसे दिन बढ़ता जाता है.…
आसुओं का समंदर.… पलकों के पीछे रुक जाता है.…
वक्त से काफी पहले.… घर से सब निकल गए.…
अगली मुलाकात तक के चंद पल.… साथ बिताने चले.…
माँ-पापा से बिटिया.… नजर नहीं मिला रही थी.…
अपनी आँखों की सच्चाई.… बयान नहीं कर पा रही थी.…
हमेशा की तरह.… माँ अपनी लाड़ली को निहार रही थी.…
सँभाल न पाती खुदको.… तो चुपके से आसू बहा रही थी.…
पापा की हालत भी.… कुछ अलग तो नहीं थी.…
उनकी प्यारी बेटी.… आज फिरसे बिछड़ रही थी.…

फ्लाईट का इंतजार करना.… सजा सा लग रहा था.…
हर कोई झूठी हसी के पीछे.… अपने आँसुओ को छुपा रहा था.…
इंतजार ख़त्म हुआ.… अब तो फ्लाईट भी आ गयी.…
बिना पीछे मुड़े.… बिटिया अंदर चली गयी.…
यूँही कुछ देर.… माँ-पापा बेटी को देखते रहे.…
अब बिना पूछे आंसू.… पलकों से बेहते रहे.…
इधर बिटिया का  भी हाल.… कुछ ऐसा ही हो रहा था.…
घर पे बिताया हर पल.… आंसू बन के बह रहा था.…
कुछ इस तरहसे.… बिदाई का दिन हर बार गुजरता है.…
बिटिया की अगली छुट्टी का.… सारा घर इंतजार करता है.…

- टिंग्याची आई 
स्पेलिंग मिस्टेक के लिए माफ़ी चाहती हूँ.… और ग्रामर भी संभाल लेना :)
भावनाओं को समझो :)

Friday, March 14, 2014

एक याद.…

एक याद है.… जो आज तक साथ है...
भुला न सकेंगे कभी... उसमे कुछ खास है...
इतने सालों बाद भी... लगती जैसे कल कि बात है...
तारों भरा आसमाँ... और वही पूनम कि रात है...
धुंदली हो गयी जिंदगी... पर उसे भुला न पाए...
छलकती है आज भी दो बुँदे... न किसीसे गिला कर पाए...
उस सुहानी रात में... वो छत पर आयी थी...
हर तारे ने रोशनी... उन्ही कि मुस्कुराहट से पायी थी...
दो दिल एक जान... कुछ ऐसाही हमारा किस्सा था...
गम हो या ख़ुशी... बराबर का हिस्सा था...
चमकता हुआ आसमाँ... उनकी आँचल में समाया था...
उम्रभर साथ का मीठा सपना... इश्क़ ने दिखाया था...
लफ्जों के बिना... यूँही एक दूसरे को ताकते रहे...
अपने प्रेमी को... आँखों में समाते रहे...
कुछ खास था उस रात में... जिसने हमें आजतक जिन्दा रखा है...
साथ तो न रहा उनका... पर आज भी प्यार सच्चा है...
जिंदगी चलती रही... राहे बिछड़ गयी...
सूख गए दो गुल... अब तो खुशबु भी निकल गयी...
जिन्दा है, जीते रहे... इस जालिम ज़माने के लिए...
इसके दस्तूर निभाते रहे... इस नामुराद जिंदगी के लिए...
गम तो नहीं है... ना वो ख़ुशी मिल पायी...
अधूरी थी जो कहानी... आज भी पूरी न हो पायी...
ख्वाईश नहीं रही अब.... के वो फिर मिलेंगे...
अब तो आदत हो गयी है... हम यूँही जी लेंगे...
खुदा का शुक्र है.…
वो एक याद तो है... जो आजतक साथ है...
कैसे भुलाएँ उसको... उसमें तो हमारी साँस है...

- टिंग्याची आई
:)

Thursday, December 26, 2013

तब घर याद आता है…

On special request by Arun... Thank you Arun for being the inspiration of this poem.... :)
Feel karke likhe hai... hope you like it... ;)
हर सुबह का सूरज… तुझे देखे बिना निकलता है…
बिना कुछ खाये-पिए… तेरा बेटा ऑफिस चल पड़ता है…
सोचता हूँ माँ होती यहाँ… तो मेरा कितना खयाल रखती…
मेरी हर छोटी बड़ी चीज का… प्यार से ध्यान रखती…
पर जितना भी हम सोचे… सिर्फ तेरी याद ही आती है…
तेरे ममताभरे आँचल कि कमी… मखमल से भी पूरी न हो पाती है…
जब सर पे तेरा हाथ नहीं सिर्फ खुला आसमाँ होता है…
माँ… तब घर याद आता है…

आपहीने सिखाया था पापा… शराब बुरी चीज होती है…
फिर भी हर Friday यहाँ… बोतले खाली होती है…
दुआ भी करते है उस बिच… आपका फोन ना आए…
अपने होनहार बेटे को… पापा इस हालत में कभी ना पाए…
ऐसीही कुछ गलतियाँ… आजकल जानबूजके हो जाती है…
कोई संभालने वाला हो… तो हर उलझन सुलझ जाती है…
जब गलतियों पे हक़ डाँटने वाला कोई नहीं होता है.… 
पापा… तब घर याद आता है…

हर राखी का त्यौहार… तेरी बहुत याद दिलाता है… कुरियर से आई राखी… भाई अपने आप ही बाँध लेता है…
तेरी हर मांग, हर शिकायत… आज भी प्यारी लगती है…
आज भी जब बिना भूले… हर बड़ेपे तेरीही फर्स्ट विष होती है…
फेसबुक मेल या फोन… पगली बातें तो बहुत होती है…
दर्द तो तब होता है… जब तुझे एक जादू कि झप्पी देनी होती है…
जब किसी प्यारीसी गुड़िया को प्यार करनेका मन करता है…
बेहना… तब घर याद आता है…
इस अनजाने शहर में हर दिन… कोई न कोई झोल होता है…
लड़ तो अकेले भी लेंगे हम… पर किसीका हाथ चाहिए होता है…
वैसे तो घरवालोंसे हमेशा… हर चोट बखूबी छुपाते है…
पर कोई चुपकेसे मरहम लगा दे… ये भी तो हम चाहते है…
हर सिक्रेट जिससे शेयर करे… वो भाई ही तो होता है…
बचपन का हर झगड़ा… अपना प्यार ही तो बढ़ाता है…
लेकिन जब दिल किसीको गले लगाना चाहता है…
भाई… तब घर याद आता है…
वीकेंडपे रूम कि खाली दीवारें… बहुतही सताती है…
जहाँ कभी मैं अकेला न था… उस छत कि याद दिलाती है…
कोई अपना नहीं है ये… पर अपनों से कम नहीं है…
जहा माँ-पापा है… और जहाँ कोई गम नहीं है…
एक आशियाना है ये… अपनों को डोरी में बांधे रखता है…
दुःख हो या सुख… यहाँ हर कोई मुस्कुराता रहता है…
छोटीसी कुटीया या बड़ी हवेली… अपना घर अपना होता है…
लौट जाऊ उस खुशियों के आँगन में… दिल हर रोज यही सपना देखता है…
जब कोई अपना पास नहीं होता है… 
तब घर से दूर आए इस पंछी को…
अपना घर याद आता है… हर पल घर याद आता है.…
:)
- टिंग्याची आई