एक याद है.… जो आज तक साथ है...
भुला न सकेंगे कभी... उसमे कुछ खास है...
इतने सालों बाद भी... लगती जैसे कल कि बात है...
तारों भरा आसमाँ... और वही पूनम कि रात है...
धुंदली हो गयी जिंदगी... पर उसे भुला न पाए...
छलकती है आज भी दो बुँदे... न किसीसे गिला कर पाए...
उस सुहानी रात में... वो छत पर आयी थी...
हर तारे ने रोशनी... उन्ही कि मुस्कुराहट से पायी थी...
दो दिल एक जान... कुछ ऐसाही हमारा किस्सा था...
गम हो या ख़ुशी... बराबर का हिस्सा था...
चमकता हुआ आसमाँ... उनकी आँचल में समाया था...
उम्रभर साथ का मीठा सपना... इश्क़ ने दिखाया था...
लफ्जों के बिना... यूँही एक दूसरे को ताकते रहे...
अपने प्रेमी को... आँखों में समाते रहे...
कुछ खास था उस रात में... जिसने हमें आजतक जिन्दा रखा है...
साथ तो न रहा उनका... पर आज भी प्यार सच्चा है...
जिंदगी चलती रही... राहे बिछड़ गयी...
सूख गए दो गुल... अब तो खुशबु भी निकल गयी...
जिन्दा है, जीते रहे... इस जालिम ज़माने के लिए...
इसके दस्तूर निभाते रहे... इस नामुराद जिंदगी के लिए...
गम तो नहीं है... ना वो ख़ुशी मिल पायी...
अधूरी थी जो कहानी... आज भी पूरी न हो पायी...
ख्वाईश नहीं रही अब.... के वो फिर मिलेंगे...
अब तो आदत हो गयी है... हम यूँही जी लेंगे...
खुदा का शुक्र है.…
वो एक याद तो है... जो आजतक साथ है...
कैसे भुलाएँ उसको... उसमें तो हमारी साँस है...
- टिंग्याची आई
:)
भुला न सकेंगे कभी... उसमे कुछ खास है...
इतने सालों बाद भी... लगती जैसे कल कि बात है...
तारों भरा आसमाँ... और वही पूनम कि रात है...
धुंदली हो गयी जिंदगी... पर उसे भुला न पाए...
छलकती है आज भी दो बुँदे... न किसीसे गिला कर पाए...
उस सुहानी रात में... वो छत पर आयी थी...
हर तारे ने रोशनी... उन्ही कि मुस्कुराहट से पायी थी...
दो दिल एक जान... कुछ ऐसाही हमारा किस्सा था...
गम हो या ख़ुशी... बराबर का हिस्सा था...
चमकता हुआ आसमाँ... उनकी आँचल में समाया था...
उम्रभर साथ का मीठा सपना... इश्क़ ने दिखाया था...
लफ्जों के बिना... यूँही एक दूसरे को ताकते रहे...
अपने प्रेमी को... आँखों में समाते रहे...
कुछ खास था उस रात में... जिसने हमें आजतक जिन्दा रखा है...
साथ तो न रहा उनका... पर आज भी प्यार सच्चा है...
जिंदगी चलती रही... राहे बिछड़ गयी...
सूख गए दो गुल... अब तो खुशबु भी निकल गयी...
जिन्दा है, जीते रहे... इस जालिम ज़माने के लिए...
इसके दस्तूर निभाते रहे... इस नामुराद जिंदगी के लिए...
गम तो नहीं है... ना वो ख़ुशी मिल पायी...
अधूरी थी जो कहानी... आज भी पूरी न हो पायी...
ख्वाईश नहीं रही अब.... के वो फिर मिलेंगे...
अब तो आदत हो गयी है... हम यूँही जी लेंगे...
खुदा का शुक्र है.…
वो एक याद तो है... जो आजतक साथ है...
कैसे भुलाएँ उसको... उसमें तो हमारी साँस है...
- टिंग्याची आई
:)




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