Monday, November 24, 2014

बिदाई का दिन….

मेरी एक प्यारीसी दोस्त है.… ऑफिस में हम लोग साथ में काम करते है.… उसका घर भुवनेश्वर में है और वो पुणे में जॉब करती है.… घर इतना दूर है तो बार बार जा नहीं सकती इसीलिए हर ६ महीने में एक बार घर जाती है लंबी छुट्टी लेके.…
और हर बार वापस आते वक्त कुछ यही समां होता है घर पे.…
उसकी बिदाई का ये दिन मेरी जबानी.…
वह दिन तो काफी सुहाना लग रहा था.…
हमेशा की तरह सूरज खुशियाँ बरसा रहा था.…
लेकिन घर में एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था.…
हर कोई बिटिया के वापिस जाने के गम में डूबा हुआ था.…

माँ की लाड़ली, पापा की प्यारी बिटिया है वो.…
छोटी की बेस्ट फ्रेंड, इस घर की खुशियाँ है वो.…
घर से दूर किसी शहर में.… लड़ो नौकरी करती है.…
६ महीने में बस एक ही बार.… घर वापस आ पाती है.…
ना कोई बंधन है यह.… और ना ही कोई मज़बूरी.…
पर बेटीका इंडिपेंडेंट होना है बहुत जरुरी.…
इसीलिए.… घर से इतनी दूर वो रह लेती है.…
जुदाई का गम.… माँ-बेटी हर दिन सहती है.…

आज भी.… बिटिया का वापसी का दिन था.…
इसीलिए सुबहसे.… घर में सन्नाटे वाला सीन था.…
पॅकिंग वगैरा सब कुछ.… कब की हो गयी थी.…
फिर भी माँ एक एक चीज़.… याद दिला रही थी.…
१५ दिन कब निकल गए.… पता ही नहीं चला था.…
फिर एक बार जुदाई का वो पल.… चुपकेसे आ गया था.…

मुश्किल हो जाते है पल.… जैसे दिन बढ़ता जाता है.…
आसुओं का समंदर.… पलकों के पीछे रुक जाता है.…
वक्त से काफी पहले.… घर से सब निकल गए.…
अगली मुलाकात तक के चंद पल.… साथ बिताने चले.…
माँ-पापा से बिटिया.… नजर नहीं मिला रही थी.…
अपनी आँखों की सच्चाई.… बयान नहीं कर पा रही थी.…
हमेशा की तरह.… माँ अपनी लाड़ली को निहार रही थी.…
सँभाल न पाती खुदको.… तो चुपके से आसू बहा रही थी.…
पापा की हालत भी.… कुछ अलग तो नहीं थी.…
उनकी प्यारी बेटी.… आज फिरसे बिछड़ रही थी.…

फ्लाईट का इंतजार करना.… सजा सा लग रहा था.…
हर कोई झूठी हसी के पीछे.… अपने आँसुओ को छुपा रहा था.…
इंतजार ख़त्म हुआ.… अब तो फ्लाईट भी आ गयी.…
बिना पीछे मुड़े.… बिटिया अंदर चली गयी.…
यूँही कुछ देर.… माँ-पापा बेटी को देखते रहे.…
अब बिना पूछे आंसू.… पलकों से बेहते रहे.…
इधर बिटिया का  भी हाल.… कुछ ऐसा ही हो रहा था.…
घर पे बिताया हर पल.… आंसू बन के बह रहा था.…
कुछ इस तरहसे.… बिदाई का दिन हर बार गुजरता है.…
बिटिया की अगली छुट्टी का.… सारा घर इंतजार करता है.…

- टिंग्याची आई 
स्पेलिंग मिस्टेक के लिए माफ़ी चाहती हूँ.… और ग्रामर भी संभाल लेना :)
भावनाओं को समझो :)

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